karvachauth kyon manaya jata hai is se judi kahaniyan
करवाचौथ हिन्दू धर्म का त्यौहार है विशेषतौर पर नारिओं का प्रमुख त्यौहार है | यह त्यौहार पति और पत्नी के प्रेम को दर्शाने वाला त्यौहार है इस दिन सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लम्बी आयु के लिए उपवास रखती है | यह कहा जाता है कि इस उपवास को रखने से वैवाहिक जीवन में ढेर सारी खुशियां आती है केवल सुहागिन स्त्रियां ही इस त्यौहार को मानती है
करवाचौथ को लगभग भारत के लगभग सभी राज्यों में मनाया जाता है करवाचौथ से पहले ही बाजारों में रौनक दिखने शुरू हो जाती है |
करवाचौथ किस दिन मनाया जाता है ?
हिन्दू पंचांग के अनुसार यह त्यौहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है |
क्यों मनाई जाती है करवाचौथ
दोस्तों हर व्रत या त्यौहार मनाने की कोई न कोई वजह जरूर होती है करवाचौथ को लेकर भी कई कहानियां प्रचिलित है प्राचीन समय में कहा जाता है कि जब सत्यवान की आत्मा को लेने के लिए यमराज धरती पर आए तो सत्यवान की पत्नी सावित्री ने उनसे अपने पति के प्राणों को वापस लौटा देने की मांगी और निवेदन किया कि वह उसके पति को न लेकर जाएं. लेकिन यमराज ने उसकी बात नहीं मानी, जिसके बाद सावित्री ने अन्न—जल का त्याग कर दिया और अपने पति के शरीर के पास बैठकर विलाप करने लगी | सावित्री के इस तरह विलाप करने से यमराज विचलित गए और उन्होंने सावित्री से कहा कि वह अपने पति सत्यवान के जीवन के आलावा कोई और वर मांग ले | सावित्री ने यमराज से कहा कि मझे कई संतानों की मां बनने का वर दें और यमराज ने भी हां कह दिया. पतिव्रता होने के नाते सावित्री अपने पति सत्यवान के अतिरिक्त किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकती थी. जिसके बाद यमराज ने वचन में बंधने के कारण सावित्री को सत्यवान का जीवन दे दिया. कहा जाता है कि तभी से सुहागिनें महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अपने अखंड सौभाग्य के लिए अन्न—जल त्यागकर करवा चौथ के दिन व्रत करती हैं
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